मनीषी एवं वैज्ञानिक · ऋषिका · ब्रह्मवादिनी
लोपामुद्रा
लोपामुद्रा
लोपामुद्रा ऋग्वेद में अपनी ही आवाज़ में बोलती हैं और अगस्त्य से कहती हैं कि तपस्या के साथ गृहस्थ जीवन को भी स्थान मिले। उनका सूक्त इस बात का सबसे साफ़ उदाहरण है कि एक स्त्री को सूक्त की दृष्टा माना गया।
मुख्य तथ्य
- काल
- ऋग्वेद काल (परंपरा के अनुसार)
- field
- मंत्र-दर्शन, संवाद-सूक्त
- sourcing
- ग्रंथों में उल्लिखित
