मनीषी एवं वैज्ञानिक · ऋषिका · ब्रह्मवादिनी
रात्रि भारद्वाजी
रात्री
रात्रि भारद्वाजी का सूक्त तारों से भरी रात से प्रार्थना करता है कि वह सुबह तक गायक की रक्षा करे। यह वैदिक कविता के सबसे शांत और सुंदर हिस्सों में है और आज भी संध्या-समय पढ़ा जाता है।
मुख्य तथ्य
- काल
- ऋग्वेद काल (परंपरा के अनुसार)
- field
- वैदिक सूक्त, संध्या-पाठ
- sourcing
- ग्रंथों में उल्लिखित
