मनीषी एवं वैज्ञानिक · ऋषिका · ब्रह्मवादिनी
विश्ववारा आत्रेयी
विश्ववारा
विश्ववारा ने ऋग्वेद 5.28 का छोटा सूक्त रचा, जिसमें सुबह जलाई गई अग्नि की स्तुति है। अत्रि वंश की इस ऋषिका का सूक्त आज भी पूजा में पढ़ा जाता है।
मुख्य तथ्य
- काल
- ऋग्वेद काल (परंपरा के अनुसार)
- field
- वैदिक सूक्त, अग्नि-पूजा
- sourcing
- ग्रंथों में उल्लिखित
