उद्गम और स्थान
वसिष्ठ सबसे आदरणीय और प्राचीन ऋषियों में हैं — ज्ञान, धैर्य और कर्तव्य की एक बड़ी मिसाल, किसी दर्ज इतिहास के व्यक्ति से अधिक एक परंपरा-पुरुष।
- मन से जन्मे पुत्र। पुराणों में उन्हें ब्रह्मा का मानसपुत्र कहा गया है, यानी सृष्टिकर्ता के मन से जन्मा पुत्र।
- सप्तऋषियों में एक। वे उन सात महान ऋषियों में गिने जाते हैं, जो हर युग में मनुष्यों और सृष्टि का मार्गदर्शन करते माने जाते हैं।
राजगुरु
रामायण में वसिष्ठ राजा दशरथ और रघुवंश के कुलगुरु के रूप में सबसे अधिक जाने जाते हैं — परिवार के पुरोहित और मुख्य सलाहकार। उन्होंने वे यज्ञ किए जिनसे राम और उनके भाइयों का जन्म हुआ, और आगे वे ही उनके पहले गुरु रहे — धर्म में भी और राजनीति में भी।
विश्वामित्र से प्रसिद्ध होड़
हिन्दू कथाओं की सबसे मशहूर होड़ वसिष्ठ और राजा कौशिक के बीच है, जो बाद में ऋषि विश्वामित्र बने।
झगड़ा तब शुरू हुआ जब कौशिक ने वसिष्ठ की मनचाहा देने वाली गाय नंदिनी (जिसे कामधेनु भी कहा जाता है) को छीनने की कोशिश की। वसिष्ठ ने केवल अपने तप-बल (ब्रह्म-तेज) से राजा की पूरी सेना को रोक दिया। इस हार ने कौशिक को हज़ारों वर्ष कठिन तपस्या के लिए प्रेरित किया, जिससे वे आख़िर में महान ऋषि विश्वामित्र बने।
विचार की विरासत
योग वासिष्ठ एक बहुत बड़ा ग्रंथ है, जो ऋषि वसिष्ठ और निराश युवा राम के संवाद के रूप में है। यह अद्वैत वेदांत के सबसे महत्वपूर्ण ग्रंथों में गिना जाता है और सच्चाई, चेतना तथा मुक्ति के प्रश्नों पर विचार करता है।
आकाश में उनका चिह्न
वसिष्ठ का विवाह अरुंधती से हुआ और दोनों को दांपत्य निष्ठा का सबसे बड़ा उदाहरण माना जाता है। पारंपरिक भारतीय खगोल में उन्हें सप्तर्षि मंडल (Ursa Major) के एक जोड़ी तारे के रूप में देखा जाता है। इन दो तारों — मिज़ार और अल्कोर — को दिखाना आज भी कई हिन्दू विवाहों की रीति है।
